मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मन: | काम: क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत् || २१||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
14 पदत्रिविधम्
तीन प्रकार का
नरकस्य
नरक का
इदम्
यह
द्वारम्
द्वार
नाशनम्
नाश करने वाला
आत्मन
आत्मा का
काम
काम
क्रोध
क्रोध
तथा
तथा
लोभ
लोभ
तस्मात्
इसलिए
एतत्
इस
त्रयम्
तीनों को
त्यजेत्
त्याग देना चाहिए।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
यह तीन प्रकार का नरक का द्वार आत्मा का नाश करने वाला है – काम, क्रोध और लोभ। इसलिए इन तीनों को त्याग देना चाहिए।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान तीन घोर दुर्गुण बताते हैं – काम, क्रोध, लोभ। ये नरक के द्वार हैं और आत्मा का पतन करते हैं। इन्हें त्यागना आवश्यक है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
यह तीन प्रकार का नरक का द्वार (काम, क्रोध, लोभ) आत्मा का नाश करने वाला है। इसलिए इन तीनों को त्याग देना चाहिए।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
काम, क्रोध और लोभ मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु हैं। इनसे मुक्त होना ही कल्याण का मार्ग है।