मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं च यत्। उच्छिष्टमपि चामेध्यं भोजनं तामसप्रियम्॥१०॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदयातयामम्
cooked (and kept) stale
गतरसम्
tasteless
पूति
putrid
पर्युषितम्
spoiled
च
and
यत्
which
उच्छिष्टम्
leavings
अपि
also
च
and
अमेध्यम्
impure
भोजनम्
food
तामसप्रियम्
dear to the tamasic.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जो भोजन पका हुआ (और बासी) हो, रसहीन हो, दुर्गन्धित हो, सड़ा हुआ हो, जूठा हो और अपवित्र हो – वह तामस पुरुषों को प्रिय होता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
तामस आहार वह है जो गुणहीन, सड़ा-गला, अपवित्र या त्यागा हुआ हो। यह शरीर और मन को निष्क्रिय, सुस्त और अशुद्ध करता है। Tamasic food is that which is stale, tasteless, decayed, impure, and left over. It promotes dullness, inertia, and impurity.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
तामस आहार वह है जो पकने के बहुत समय बाद (बासी), रसहीन, दुर्गन्धित, सड़ा हुआ, अपवित्र, और दूसरों द्वारा छोड़ा हुआ (जूठा) हो। ऐसा भोजन तामसी प्रवृत्ति के लोगों को प्रिय होता है, क्योंकि यह अज्ञान और आलस्य को बढ़ाता है।
Tamasic food is that which is overcooked/stale, tasteless, putrid, decomposed, impure, and leftovers of others. It is liked by those with tamasic nature, as it promotes ignorance, dullness, and inertia.