श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 17 (श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 17 · श्लोक 13

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 114 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
विधिहीनमसृष्टान्नं मन्त्रहीनमदक्षिणम्। श्रद्धाविरहितं यज्ञं तामसं परिचक्षते॥१३॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

8 पद
विधिहीनम्
devoid of scriptural direction
असृष्टान्नम्
without distribution of food
मन्त्रहीनम्
devoid of mantras
अदक्षिणम्
without gifts (fees) to priests
श्रद्धाविरहितम्
devoid of faith
यज्ञम्
sacrifice
तामसम्
tamasic
परिचक्षते
declare.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जो यज्ञ विधि-हीन हो, बिना अन्न-वितरण का हो, मन्त्र-हीन हो, बिना दक्षिणा का हो और श्रद्धा-रहित हो – वह तामस कहा जाता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

तामस यज्ञ शास्त्रीय विधि, मन्त्र, श्रद्धा, दक्षिणा और अन्न-वितरण से रहित होता है। यह केवल नाममात्र का होता है, बिना किसी वास्तविक भाव या नियम के। A tamasic sacrifice is performed without following the scriptures, without mantras, without charity, without distribution of food, and without faith. It is merely a show, devoid of spiritual substance.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान् बताते हैं कि जो यज्ञ शास्त्र-विधि से रहित है, जिसमें अन्न का वितरण नहीं होता, मन्त्रों का उच्चारण नहीं होता, दक्षिणा नहीं दी जाती, और जो श्रद्धा से रहित होता है – वह तामस यज्ञ कहलाता है। ऐसा यज्ञ निष्फल और निम्न श्रेणी का होता है।

The Lord declares: That sacrifice which is contrary to the scriptural injunctions, in which no food is distributed, which is devoid of mantras, gifts to priests, and faith – is called tamasic. Such a sacrifice is fruitless and of the lowest quality.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 17: श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga)
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श्लोक 13/28 46% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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