श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 17 (श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 17 · श्लोक 14

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 114 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम्। ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते॥१४॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
देव
the gods
द्विज
the twice-born
गुरु
the teacher
प्राज्ञ
the wise
पूजनम्
worship
शौचम्
purity
आर्जवम्
straightforwardness
ब्रह्मचर्यम्
celibacy
अहिंसा
non-injury
च
and
शारीरम्
of the body
तप
austerity
उच्यते
is said.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

देवताओं, ब्राह्मणों, गुरुओं और बुद्धिमानों की पूजा, पवित्रता, सरलता, ब्रह्मचर्य और अहिंसा – यह शारीरिक तप कहा जाता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

शारीरिक तप के अंतर्गत शरीर द्वारा किए जाने वाले धार्मिक आचरण आते हैं – जैसे देवता, गुरु और ज्ञानियों का सम्मान, बाहरी और आंतरिक शुद्धि, सरल व्यवहार, ब्रह्मचर्य और अहिंसा। Physical austerity consists of reverential service to gods, brahmins, teachers, and the wise, along with cleanliness, honesty, celibacy, and non-violence – all performed through the body.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान् अब तप के तीन प्रकार बताते हैं। शारीरिक तप में देवताओं, द्विजों (ब्राह्मणों), गुरुओं और ज्ञानियों का पूजन (सम्मान), शौच (बाहरी-आभ्यन्तर पवित्रता), आर्जव (सरलता), ब्रह्मचर्य (इन्द्रिय-निग्रह) और अहिंसा शामिल हैं। ये वे क्रियाएँ हैं जो शरीर के द्वारा की जाती हैं।

The Lord now describes the threefold austerity. Physical austerity includes worship of gods, the twice-born, teachers, and the wise; purity, straightforwardness, celibacy, and non-violence. These are practices performed through the body.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 17: श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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