श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 17 (श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 17 · श्लोक 16

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 3 मिनट का पठन 125 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
मनःप्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः। भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते॥१६॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
मनःप्रसाद
cheerfulness of mind
सौम्यत्वम्
gentleness
मौनम्
silence (thought control)
आत्मविनिग्रह
self-control
भावसंशुद्धि
purity of thought
इति
thus
एतत्
this
तप
austerity
मानसम्
mental
उच्यते
is said.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

मन की प्रसन्नता, सौम्यता, मौन, आत्म-निग्रह (मन को वश में रखना) और भावों (विचारों) की पवित्रता – यह मानसिक तप कहा जाता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

मानसिक तप में मन की प्रसन्नता, कोमलता, मौन (अनावश्यक चिन्तन से मुक्ति), आत्म-संयम और विचारों की शुद्धता शामिल है। यह आन्तरिक अनुशासन है। Mental austerity includes serenity of mind, gentleness, silence, self-restraint, and purity of thoughts. It is the inner discipline of one's thoughts and emotions.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

मानसिक तप वह है जो मन के द्वारा किया जाता है – मन की प्रसन्नता (शान्ति), सौम्यता (दूसरों के प्रति कोमल भाव), मौन (अन्तर्मुखता, वाणी और मन का संयम), आत्म-निग्रह (इन्द्रियों और मन पर नियंत्रण), और भावों (विचारों) की पूर्ण शुद्धि।

Mental austerity consists of cheerfulness of mind, gentleness, inner silence (withdrawal from excessive thinking), self-control, and purity of thoughts. This is the discipline of the inner self.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 17: श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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