मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
मनःप्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः। भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते॥१६॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदमनःप्रसाद
cheerfulness of mind
सौम्यत्वम्
gentleness
मौनम्
silence (thought control)
आत्मविनिग्रह
self-control
भावसंशुद्धि
purity of thought
इति
thus
एतत्
this
तप
austerity
मानसम्
mental
उच्यते
is said.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
मन की प्रसन्नता, सौम्यता, मौन, आत्म-निग्रह (मन को वश में रखना) और भावों (विचारों) की पवित्रता – यह मानसिक तप कहा जाता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
मानसिक तप में मन की प्रसन्नता, कोमलता, मौन (अनावश्यक चिन्तन से मुक्ति), आत्म-संयम और विचारों की शुद्धता शामिल है। यह आन्तरिक अनुशासन है। Mental austerity includes serenity of mind, gentleness, silence, self-restraint, and purity of thoughts. It is the inner discipline of one's thoughts and emotions.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
मानसिक तप वह है जो मन के द्वारा किया जाता है – मन की प्रसन्नता (शान्ति), सौम्यता (दूसरों के प्रति कोमल भाव), मौन (अन्तर्मुखता, वाणी और मन का संयम), आत्म-निग्रह (इन्द्रियों और मन पर नियंत्रण), और भावों (विचारों) की पूर्ण शुद्धि।
Mental austerity consists of cheerfulness of mind, gentleness, inner silence (withdrawal from excessive thinking), self-control, and purity of thoughts. This is the discipline of the inner self.