श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 17 (श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 17 · श्लोक 23

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 121 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ॐतत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः। ब्राह्मणास्तेन वेदाश्च यज्ञाश्च विहिताः पुरा॥२३॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

16 पद
ॐ
Om
तत्
Tat
सत्
Sat
इति
thus
निर्देश
designations
ब्रह्मण
of Brahman (the Supreme)
त्रिविध
threefold
स्मृतः
are considered
ब्राह्मणा
the Brahmins
तेन
by that
वेदाः
the Vedas
च
and
यज्ञाः
sacrifices
च
and
विहिताः
were created
पुरा
in ancient times.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

ॐ, तत्, सत् – यह ब्रह्म (परमात्मा) का तीन प्रकार से निर्देश (नाम) कहा गया है। इसी (तीन नामों) द्वारा प्राचीन काल में ब्राह्मण, वेद और यज्ञ रचे गए।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक "ॐ तत् सत्" के महत्व को बताता है। ये तीनों शब्द परब्रह्म के विभिन्न पहलुओं के सूचक हैं। इन्हीं के माध्यम से सृष्टि के आरम्भ में ब्राह्मण, वेद और यज्ञ प्रकट हुए। The verse introduces the threefold designation of Brahman: Om, Tat, Sat. These sacred syllables represent the Supreme and were used in the creation of the Brahmins, the Vedas, and the sacrifices.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान् अब "ॐ तत् सत्" के रहस्य का उद्घाटन करते हैं। ये तीन शब्द परम ब्रह्म (परमात्मा) के तीन नाम या संकेत हैं। सृष्टि के प्रारम्भ में इन्हीं तीन नामों के द्वारा ब्राह्मण (वेदों के ज्ञाता), वेद और यज्ञों की रचना हुई।

The Lord reveals the significance of "Om Tat Sat". These three words are the threefold designation of the Supreme Brahman. In ancient times, by these were created the Brahmins, the Vedas, and the sacrifices.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 17: श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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