श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 17 (श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 17 · श्लोक 24

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 117 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपःक्रियाः। प्रवर्तन्ते विधानोक्ताः सततं ब्रह्मवादिनाम्॥२४॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
तस्मात्
therefore
ॐ
Om
इति
thus
उदाहृत्य
uttering
यज्ञ
sacrifice
दान
charity
तपः
austerity
क्रियाः
acts
प्रवर्तन्ते
begin
विधानोक्ता
as prescribed in the scriptures
सततम्
always
ब्रह्मवादिनाम्
of the followers of the Vedas.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

इसलिए, वेदों के अनुयायी (ब्रह्मवादी) लोग शास्त्र-विधि से नियत यज्ञ, दान और तप की क्रियाओं को "ॐ" का उच्चारण करके ही आरम्भ करते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यज्ञ, दान और तप – ये तीनों क्रियाएँ जब वैदिक विधि से की जाती हैं, तो उनका आरम्भ "ॐ" के उच्चारण से होता है। यह ईश्वर को स्मरण करने और कर्म को पवित्र करने का तरीका है। Acts of sacrifice, charity, and austerity, when performed according to scriptural injunctions, are commenced by uttering "Om", invoking the divine presence.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

इसलिए (ॐ तत् सत् के इस निर्देश के अनुसार), वेदों के मार्ग पर चलने वाले (ब्रह्मवादी) लोग शास्त्रों में बताए गए यज्ञ, दान और तप के कर्मों को हमेशा "ॐ" का उच्चारण करके ही प्रारम्भ करते हैं। यह कर्मों को ईश्वर को समर्पित करने का संकेत है।

Therefore, those who follow the Vedic path always begin their acts of sacrifice, charity, and austerity, as prescribed in the scriptures, by uttering "Om". This invocation sanctifies the action and dedicates it to the Supreme.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 17: श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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