मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सद्भावे साधुभावे च सदित्येतत्प्रयुज्यते। प्रशस्ते कर्मणि तथा सच्छब्दः पार्थ युज्यते॥२६॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदसद्भावे
in the sense of existence
साधुभावे
in the sense of goodness
च
and
सत्
Sat
इति
thus
एतत्
this
प्रयुज्यते
is used
प्रशस्ते
in auspicious
कर्मणि
action
तथा
also
सत्-शब्दः
the word Sat
पार्थ
O Partha
युज्यते
is used.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
सत् शब्द का प्रयोग सद्भाव (वस्तु की सत्ता) और साधुभाव (उत्तमता) के अर्थ में होता है। तथा हे पार्थ! प्रशस्त (शुभ) कर्म में भी सत् शब्द का प्रयोग किया जाता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अब "सत्" शब्द के अर्थ बताए गए हैं – यह सत्ता (विद्यमानता) और साधुता (अच्छाई) का वाचक है। शुभ कर्मों को भी "सत्" कहा जाता है, क्योंकि वे सत् (सत्य/कल्याण) की ओर ले जाते हैं। The word "Sat" signifies existence (reality) and goodness. It is also used in the context of auspicious actions, indicating that they are true and beneficial.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे पार्थ (अर्जुन)! "सत्" शब्द का प्रयोग दो अर्थों में होता है – सद्भाव (वास्तविकता, सत्ता) और साधुभाव (उत्तमता, भलाई) के लिए। इसके अतिरिक्त, किसी शुभ (प्रशस्त) कर्म के लिए भी "सत्" शब्द का प्रयोग किया जाता है।
O Partha (Arjuna)! The word "Sat" is used in the sense of existence (reality) and goodness. Also, it is used in the context of an auspicious or beneficial action.