मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः। रस्याः स्निग्धाः स्थिरा हृद्या आहाराः सात्त्विकप्रियाः॥८॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदआयुः
life
सत्त्व
strength of mind
बल
strength
आरोग्य
health
सुख
happiness
प्रीति
cheerfulness
विवर्धनाः
promoting
रस्याः
juicy
स्निग्धाः
oily
स्थिराः
substantial
हृद्याः
agreeable
आहाराः
foods
सात्त्विकप्रियाः
dear to the sattvic.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जो आहार आयु, बुद्धि (सत्त्व), बल, आरोग्य, सुख और प्रीति को बढ़ाने वाले हों, रसयुक्त, चिकने, स्थिर और हृदय को अच्छे लगने वाले हों – ऐसे आहार सात्त्विक पुरुषों को प्रिय होते हैं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
सात्त्विक आहार के लक्षण बताए गए हैं: यह शरीर और मन दोनों के लिए पौष्टिक, संतुलित और आनंददायक होता है। यह व्यक्ति की दीर्घायु, मानसिक शक्ति और प्रसन्नता में वृद्धि करता है। Sattvic food is described as that which nourishes both body and mind, increasing longevity, strength, health, and happiness. It is juicy, oily, firm, and pleasing.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान् सात्त्विक आहार के गुण बताते हैं: यह आयु (दीर्घायु), सत्त्व (मानसिक बल), शारीरिक बल, आरोग्य, सुख और प्रीति (संतोष) को बढ़ाने वाला होता है। यह रसयुक्त (स्वादिष्ट), स्निग्ध (तैलीय), स्थिर (पुष्टिकर) और हृदय को प्रिय होता है। ऐसा भोजन सात्त्विक व्यक्तियों को प्रिय होता है।
The Lord describes sattvic food: it increases longevity, mental strength, physical vigor, health, happiness, and delight. It is juicy, fatty (wholesome), substantial, and pleasing to the heart. Such food is dear to those who are sattvic.