मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः । तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम् ॥ १६॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदज्ञानेन
ज्ञान द्वारा
तु
परन्तु
तत्
उस
अज्ञानम्
अज्ञान को
येषाम्
जिनका
नाशितम्
नष्ट कर दिया गया है
आत्मनः
अपने
तेषाम्
उनका
आदित्यवत्
सूर्य के समान
ज्ञानम्
ज्ञान
प्रकाशयति
प्रकाशित करता है
तत् परम्
उस परम तत्त्व को।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
परन्तु जिन पुरुषों का वह अज्ञान आत्म-ज्ञान द्वारा नष्ट कर दिया गया है, उनका वह ज्ञान सूर्य के समान उस परम तत्त्व (ब्रह्म) को प्रकाशित कर देता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
जब अज्ञान आत्म-ज्ञान से नष्ट हो जाता है, तब ज्ञान स्वतः ही परमात्मा के दर्शन करा देता है, जैसे सूर्य उदय होने पर सब कुछ प्रकाशित हो जाता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
जिन लोगों ने आत्म-ज्ञान के द्वारा अज्ञान को नष्ट कर दिया है, उनके लिए वह ज्ञान स्वयं ही सूर्य के समान परमात्मा को प्रकाशित कर देता है। उनके लिए कोई अंधकार नहीं रहता।