मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठास्तत्परायणाः । गच्छन्त्यपुनरावृत्तिं ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः ॥ १७॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
7 पदतद्बुद्धयः
जिनकी बुद्धि उस (परमात्मा) में लगी है
तदात्मानः
जिनका चित्त उसमें लगा है
तन्निष्ठाः
जिनकी निष्ठा उसमें है
तत्परायणाः
जो उसी को परम लक्ष्य मानते हैं
गच्छन्ति
जाते हैं
अपुनरावृत्तिम्
पुनर्जन्म रहित स्थान
ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः
ज्ञान से पापों से रहित हुए।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जिनकी बुद्धि उस (परमात्मा) में लगी है, जिनका चित्त उसी में है, जिनकी निष्ठा उसी में है और जो उसी को परम लक्ष्य मानते हैं, वे ज्ञान द्वारा सब पापों से रहित होकर पुनर्जन्म रहित पद (मोक्ष) को प्राप्त होते हैं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
इस श्लोक में भक्ति और समर्पण के मार्ग का वर्णन है। जो पूरी तरह से परमात्मा में स्थित हो जाते हैं, उनके सभी पाप (संस्कार) ज्ञान से धुल जाते हैं और वे मुक्त हो जाते हैं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
जिनकी बुद्धि, मन, निष्ठा और परम लक्ष्य केवल परमात्मा में हैं, वे ज्ञान से सभी पापों से मुक्त होकर उस परम धाम को प्राप्त होते हैं, जहाँ से लौटना नहीं होता।