श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 5 (कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga))

अध्याय 5 · श्लोक 25

कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 29 2 मिनट का पठन 117 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः । छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥ २५॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

8 पद
लभन्ते
प्राप्त करते हैं
ब्रह्मनिर्वाणम्
ब्रह्म-निर्वाण
ऋषयः
ऋषिगण
क्षीणकल्मषाः
जिनके पाप (संस्कार) नष्ट हो गए हैं
छिन्नद्वैधाः
जिनके सन्देह छिन्न हो गए हैं
यतात्मानः
संयत चित्त वाले
सर्वभूतहिते
सब प्राणियों के हित में
रताः
लगे रहने वाले।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जिनके सम्पूर्ण पाप नष्ट हो गए हैं, जिनके सब सन्देह कट गए हैं, जो संयत चित्त वाले हैं और सब प्राणियों के हित में लगे रहते हैं – ऐसे ऋषिगण ब्रह्म-निर्वाण को प्राप्त करते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

मोक्ष के लिए आवश्यक गुण बताए गए हैं – पापों का नाश, सन्देहों का अन्त, मन पर नियंत्रण, और सब प्राणियों के हित में रत रहना। ऐसे साधक मोक्ष प्राप्त करते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जिन ऋषियों के सारे पाप नष्ट हो गए हैं, जिनके सन्देह मिट गए हैं, जिनका मन वश में है और जो सभी प्राणियों के हित में संलग्न हैं – वे ब्रह्म-निर्वाण को प्राप्त करते हैं।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 5: कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 25 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 25/29 86% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!