मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः । छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥ २५॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
8 पदलभन्ते
प्राप्त करते हैं
ब्रह्मनिर्वाणम्
ब्रह्म-निर्वाण
ऋषयः
ऋषिगण
क्षीणकल्मषाः
जिनके पाप (संस्कार) नष्ट हो गए हैं
छिन्नद्वैधाः
जिनके सन्देह छिन्न हो गए हैं
यतात्मानः
संयत चित्त वाले
सर्वभूतहिते
सब प्राणियों के हित में
रताः
लगे रहने वाले।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जिनके सम्पूर्ण पाप नष्ट हो गए हैं, जिनके सब सन्देह कट गए हैं, जो संयत चित्त वाले हैं और सब प्राणियों के हित में लगे रहते हैं – ऐसे ऋषिगण ब्रह्म-निर्वाण को प्राप्त करते हैं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
मोक्ष के लिए आवश्यक गुण बताए गए हैं – पापों का नाश, सन्देहों का अन्त, मन पर नियंत्रण, और सब प्राणियों के हित में रत रहना। ऐसे साधक मोक्ष प्राप्त करते हैं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
जिन ऋषियों के सारे पाप नष्ट हो गए हैं, जिनके सन्देह मिट गए हैं, जिनका मन वश में है और जो सभी प्राणियों के हित में संलग्न हैं – वे ब्रह्म-निर्वाण को प्राप्त करते हैं।