श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 5 (कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga))

अध्याय 5 · श्लोक 26

कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 29 2 मिनट का पठन 112 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम् । अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम् ॥ २६॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

7 पद
कामक्रोधवियुक्तानाम्
काम और क्रोध से रहित
यतीनाम्
योगियों (संन्यासियों) के
यतचेतसाम्
संयत चित्त वाले
अभितः
सब ओर (निकट ही)
ब्रह्मनिर्वाणम्
ब्रह्म-निर्वाण
वर्तते
स्थित है
विदितात्मनाम्
आत्मज्ञानियों के।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

काम और क्रोध से रहित, संयत चित्त वाले, आत्मज्ञानी योगियों के लिए ब्रह्म-निर्वाण (मोक्ष) सब ओर (निकट ही) विद्यमान है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

जिन्होंने काम-क्रोध को जीत लिया है, मन को वश में कर लिया है, और आत्म-तत्त्व को जान लिया है, उनके लिए मोक्ष दूर नहीं, बल्कि सदा उपलब्ध है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

काम और क्रोध से मुक्त, मन को वश में किए हुए और आत्मतत्त्व को जानने वाले योगियों के लिए ब्रह्म-निर्वाण (मोक्ष) सदा ही प्राप्त है – वह उनसे दूर नहीं।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 5: कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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