मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम् । अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम् ॥ २६॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
7 पदकामक्रोधवियुक्तानाम्
काम और क्रोध से रहित
यतीनाम्
योगियों (संन्यासियों) के
यतचेतसाम्
संयत चित्त वाले
अभितः
सब ओर (निकट ही)
ब्रह्मनिर्वाणम्
ब्रह्म-निर्वाण
वर्तते
स्थित है
विदितात्मनाम्
आत्मज्ञानियों के।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
काम और क्रोध से रहित, संयत चित्त वाले, आत्मज्ञानी योगियों के लिए ब्रह्म-निर्वाण (मोक्ष) सब ओर (निकट ही) विद्यमान है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
जिन्होंने काम-क्रोध को जीत लिया है, मन को वश में कर लिया है, और आत्म-तत्त्व को जान लिया है, उनके लिए मोक्ष दूर नहीं, बल्कि सदा उपलब्ध है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
काम और क्रोध से मुक्त, मन को वश में किए हुए और आत्मतत्त्व को जानने वाले योगियों के लिए ब्रह्म-निर्वाण (मोक्ष) सदा ही प्राप्त है – वह उनसे दूर नहीं।