श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 5 (कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga))

अध्याय 5 · श्लोक 28

कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 29 2 मिनट का पठन 126 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः । विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः ॥ २८॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

9 पद
यतेन्द्रियमनोबुद्धिः
संयत इन्द्रिय, मन और बुद्धि वाला
मुनिः
मुनि
मोक्षपरायणः
मोक्ष परायण
विगतेच्छाभयक्रोधः
इच्छा, भय और क्रोध से रहित
यः
जो
सदा
सदा
मुक्त
मुक्त
एव
ही
सः
वह।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

...इस प्रकार जो मुनि संयत इन्द्रिय, मन और बुद्धि वाला, मोक्ष-परायण, इच्छा, भय और क्रोध से रहित है, वह सदा के लिए मुक्त ही है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

पिछले श्लोक में बताई गई ध्यान-विधि से साधक इन्द्रिय, मन और बुद्धि पर विजय पा लेता है। ऐसा मुनि, जो मोक्ष को ही परम लक्ष्य मानता है और इच्छा, भय, क्रोध से मुक्त है, वह सदा मुक्त ही है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जिसने इन्द्रियों, मन और बुद्धि को वश में कर लिया है, जो मोक्ष को ही परम लक्ष्य मानता है, और जो इच्छा, भय और क्रोध से रहित है – ऐसा मुनि सदा के लिए मुक्त है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 5: कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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