श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 5 (कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga))

अध्याय 5 · श्लोक 3

कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 29 2 मिनट का पठन 131 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ज्ञेयः स नित्यसंन्यासी यो न द्वेष्टि न काङ्क्षति । निर्द्वन्द्वो हि महाबाहो सुखं बन्धात्प्रमुच्यते ॥ ३॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
ज्ञेयः
जानना चाहिए
सः
वह
नित्यसंन्यासी
सदा संन्यासी
यः
जो
न
नहीं
द्वेष्टि
द्वेष करता है
न
नहीं
काङ्क्षति
इच्छा रखता है
निर्द्वन्द्वः
द्वन्द्वों से रहित
हि
निश्चय ही
महाबाहो
हे महाबाहो
सुखम्
सुखपूर्वक
बन्धात्
बन्धन से
प्रमुच्यते
मुक्त हो जाता है।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे महाबाहो! जो न किसी से द्वेष करता है और न किसी की कामना करता है, वह नित्य-संन्यासी जानना चाहिए। क्योंकि द्वन्द्वों से रहित होकर वह सुखपूर्वक बन्धन से मुक्त हो जाता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

सच्चा संन्यासी वह नहीं जिसने बाहरी कर्म छोड़ दिए, बल्कि जिसने मन से आसक्ति और द्वेष का त्याग कर दिया है। द्वन्द्व (सुख-दुःख, गर्मी-सर्दी आदि) से मुक्त व्यक्ति आसानी से मुक्त हो जाता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

बाहरी त्याग से अधिक महत्वपूर्ण है आंतरिक त्याग। जो न तो किसी से द्वेष करता है और न ही किसी चीज़ की लालसा, वही सच्चा संन्यासी है। ऐसा व्यक्ति द्वन्द्वों से ऊपर उठकर सहज ही मुक्त हो जाता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 5: कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 3 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 3/29 10% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!