श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 6 (ध्यान योग (Dhyan Yoga))

अध्याय 6 · श्लोक 23

ध्यान योग (Dhyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 47 2 मिनट का पठन 109 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तं विद्याद्दुःखसंयोगवियोगं योगसञ्ज्ञितम् । स निश्चयेन योक्तव्यो योगोऽनिर्विण्णचेतसा ॥ २३॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

9 पद
तम्
उसको
विद्यात्
जाने
दुःखसंयोगवियोगम्
दुःख के संयोग से वियोग (मुक्ति)
योगसञ्ज्ञितम्
योग नामक
स
वह
निश्चयेन
निश्चय के साथ
योक्तव्यः
योग में लगना चाहिए
योगः
योग
अनिर्विण्णचेतसा
उदास मन से रहित होकर।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

दुःख के संयोग से वियोग (छुटकारा) जो है, वही योग के नाम से जाना जाता है। उस योग का अभ्यास निश्चय के साथ और अनिर्विण्ण चित्त से (बिना खीझे) करना चाहिए।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

योग की परिभाषा: दुःखों के संयोग से अलग हो जाना। इसका अभ्यास निश्चय और उत्साह से करना चाहिए।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

दुःख के संयोग से वियोग (मुक्ति) ही योग है। उस योग का अभ्यास निश्चय के साथ, बिना खीझे हुए चित्त से करना चाहिए।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

योग का सार है दुःखों से छुटकारा। यह अभ्यास धैर्य और दृढ़ संकल्प से ही सफल होता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 6: ध्यान योग (Dhyan Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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