मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सङ्कल्पप्रभवान्कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषतः । मनसैवेन्द्रियग्रामं विनियम्य समन्ततः ॥ २४॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदसङ्कल्पप्रभवान्
संकल्पों से उत्पन्न
कामान्
कामनाओं को
त्यक्त्वा
त्यागकर
सर्वान्
सबको
अशेषतः
पूर्णतः
मनसा
मन के द्वारा
एव
ही
इन्द्रियग्रामम्
इन्द्रिय-समूह को
विनियम्य
अच्छी तरह नियंत्रित करके
समन्ततः
सब ओर से।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
संकल्पों से उत्पन्न सब कामनाओं का पूर्णतः त्याग करके और सब ओर से इन्द्रिय-समूह को मन के द्वारा अच्छी तरह नियंत्रित करके।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
योग के अभ्यास की तैयारी: सभी कामनाओं का त्याग और इन्द्रियों को मन द्वारा वश में करना।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
सभी संकल्पों से उत्पन्न कामनाओं को पूर्णतः त्यागकर, और सब ओर से इन्द्रिय-समूह को मन द्वारा भली-भाँति नियंत्रित करके।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
योग का मार्ग आंतरिक त्याग और इन्द्रिय-निग्रह से होकर जाता है।