श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 6 (ध्यान योग (Dhyan Yoga))

अध्याय 6 · श्लोक 24

ध्यान योग (Dhyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 47 2 मिनट का पठन 106 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सङ्कल्पप्रभवान्कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषतः । मनसैवेन्द्रियग्रामं विनियम्य समन्ततः ॥ २४॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
सङ्कल्पप्रभवान्
संकल्पों से उत्पन्न
कामान्
कामनाओं को
त्यक्त्वा
त्यागकर
सर्वान्
सबको
अशेषतः
पूर्णतः
मनसा
मन के द्वारा
एव
ही
इन्द्रियग्रामम्
इन्द्रिय-समूह को
विनियम्य
अच्छी तरह नियंत्रित करके
समन्ततः
सब ओर से।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

संकल्पों से उत्पन्न सब कामनाओं का पूर्णतः त्याग करके और सब ओर से इन्द्रिय-समूह को मन के द्वारा अच्छी तरह नियंत्रित करके।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

योग के अभ्यास की तैयारी: सभी कामनाओं का त्याग और इन्द्रियों को मन द्वारा वश में करना।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

सभी संकल्पों से उत्पन्न कामनाओं को पूर्णतः त्यागकर, और सब ओर से इन्द्रिय-समूह को मन द्वारा भली-भाँति नियंत्रित करके।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

योग का मार्ग आंतरिक त्याग और इन्द्रिय-निग्रह से होकर जाता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 6: ध्यान योग (Dhyan Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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