मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
प्रशान्तमनसं ह्येनं योगिनं सुखमुत्तमम् । उपैति शान्तरजसं ब्रह्मभूतमकल्मषम् ॥ २७॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदप्रशान्तमनसम्
शान्त मन वाले
हि
निश्चय ही
एनम्
इस
योगिनम्
योगी को
सुखम्
सुख
उत्तमम्
उत्तम
उपैति
प्राप्त होता है
शान्तरजसम्
शान्त हुए रजोगुण वाले
ब्रह्मभूतम्
ब्रह्मरूप हुए
अकल्मषम्
पापरहित।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
शान्त मन वाले, शान्त हुए रजोगुण वाले, ब्रह्मभूत और निष्पाप इस योगी को परम सुख प्राप्त होता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
जिसका मन शांत है, रजोगुण शांत हो गया है, वह ब्रह्मस्वरूप हो जाता है और परम सुख को प्राप्त करता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
शान्त मन वाले, जिसका रजोगुण शांत हो गया है, जो ब्रह्मरूप और पापरहित हो गया है, उस योगी को परम सुख प्राप्त होता है।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
योगी की शांति और पवित्रता ही उसे परम सुख का अधिकारी बनाती है।