मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
एतन्मे संशयं कृष्ण छेत्तुमर्हस्यशेषतः । त्वदन्यः संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते ॥ ३९॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
14 पदएतत्
यह
मे
मेरा
संशयम्
संशय
कृष्ण
हे कृष्ण
छेत्तुम्
छेदन करने के लिए
अर्हसि
तुम योग्य हो
अशेषतः
पूर्णतया
त्वत्-अन्यः
तुमसे दूसरा
संशयस्य
संशय का
अस्य
इस
छेत्ता
छेदन करने वाला
न
नहीं
हि
निश्चय ही
उपपद्यते
संभव है।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे कृष्ण! आप इस मेरे संशय को पूर्णतः दूर करने के योग्य हैं। आपके अतिरिक्त इस संशय का छेदन करने वाला कोई और मिलना संभव नहीं है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अर्जुन कृष्ण से ही अपनी शंका का समाधान चाहते हैं, क्योंकि वे ही सर्वज्ञ हैं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे कृष्ण! आप मेरे इस संशय को पूर्णतः दूर करने की कृपा करें। आपके अतिरिक्त इस संशय का निवारण करने वाला दूसरा कोई नहीं हो सकता।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
गुरु ही शिष्य के संशयों को दूर कर सकता है। अर्जुन पूर्ण श्रद्धा से कृष्ण का सहारा लेते हैं।