श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 6 (ध्यान योग (Dhyan Yoga))

अध्याय 6 · श्लोक 42

ध्यान योग (Dhyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 47 2 मिनट का पठन 96 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम् । एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम् ॥ ४२॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
अथवा
अथवा
योगिनाम्
योगियों के
एव
ही
कुले
कुल में
भवति
होता है
धीमताम्
बुद्धिमान
एतत्
यह
हि
निश्चय ही
दुर्लभतरम्
अत्यन्त दुर्लभ
लोके
लोक में
जन्म
जन्म
यत्
जो
ईदृशम्
ऐसा।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

अथवा वह बुद्धिमान योगियों के कुल में जन्म लेता है। निश्चय ही ऐसा जन्म इस लोक में अत्यन्त दुर्लभ है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

योगभ्रष्ट को सीधे योगियों के कुल में जन्म मिल सकता है, जो उसके लिए और भी अनुकूल होता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

अथवा वह बुद्धिमान योगियों के कुल में जन्म लेता है। ऐसा जन्म इस लोक में अत्यन्त दुर्लभ है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

योगियों के कुल में जन्म लेने से व्यक्ति को पूर्व संस्कारों का लाभ मिलता है और साधना में सहायता होती है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 6: ध्यान योग (Dhyan Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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