श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 6 (ध्यान योग (Dhyan Yoga))

अध्याय 6 · श्लोक 7

ध्यान योग (Dhyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 47 2 मिनट का पठन 130 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः । शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ॥ ७॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

7 पद
जितात्मनः
जीते हुए मन वाले
प्रशान्तस्य
शांत पुरुष के
परमात्मा
परमात्मा
समाहितः
सम्यक् रूप से स्थित
शीतोष्णसुखदुःखेषु
सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख में
तथा
तथा
मानापमानयोः
मान-अपमान में।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जिसने मन को जीत लिया है और जो शान्त है, उसका परमात्मा में सम्यक् रूप से स्थित हो जाता है, वह शीत-उष्ण, सुख-दुःख तथा मान-अपमान में भी समान रहता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

जिसने मन को जीत लिया है, वह शांत हो जाता है और परमात्मा उसमें समाहित हो जाता है। ऐसा व्यक्ति सभी द्वंद्वों से ऊपर उठ जाता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जिस व्यक्ति ने मन को जीत लिया है और जो शांत है, वह परमात्मा में स्थित हो जाता है। वह सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख, मान-अपमान में समान रहता है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

योग की कसौटी है – द्वंद्वों में समता। जो इस समता को प्राप्त कर लेता है, वह परमात्मा को प्राप्त कर लेता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 6: ध्यान योग (Dhyan Yoga)
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श्लोक 7/47 15% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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