मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम् । बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् ॥ १०॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदबीजम्
बीज
माम्
मुझे
सर्वभूतानाम्
समस्त प्राणियों का
विद्धि
जान
पार्थ
हे पार्थ
सनातनम्
सनातन
बुद्धि
बुद्धि
बुद्धिमताम्
बुद्धिमानों में
अस्मि
हूँ
तेजः
तेज
तेजस्विनाम्
तेजस्वियों में
अहम्
मैं।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे पार्थ! मुझे समस्त प्राणियों का सनातन बीज जान। मैं बुद्धिमानों की बुद्धि हूँ और तेजस्वियों का तेज हूँ।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
बीज रूप में ईश्वर सबमें अव्यक्त रूप से विद्यमान है। वह बुद्धि और तेज का भी स्रोत है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे अर्जुन! मुझे समस्त प्राणियों का सनातन बीज (मूल कारण) जानो। मैं बुद्धिमानों की बुद्धि हूँ और तेजस्वियों का तेज हूँ।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
ईश्वर ही सबका आदि कारण है। जो कुछ भी श्रेष्ठ है – बुद्धि, तेज – वह उसी का अंश है।