श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 7 (ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga))

अध्याय 7 · श्लोक 9

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 30 2 मिनट का पठन 124 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
पुण्यो गन्धः पृथिव्यां च तेजश्चास्मि विभावसौ । जीवनं सर्वभूतेषु तपश्चास्मि तपस्विषु ॥ ९॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
पुण्यः
पवित्र
गन्धः
गन्ध
पृथिव्याम्
पृथ्वी में
च
और
तेजः
तेज
च
भी
अस्मि
हूँ
विभावसौ
अग्नि में
जीवनम्
जीवन
सर्वभूतेषु
समस्त प्राणियों में
तपः
तप
च
भी
अस्मि
हूँ
तपस्विषु
तपस्वियों में।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

मैं पृथ्वी में पुण्य गन्ध हूँ और अग्नि में तेज हूँ; समस्त प्राणियों में जीवन हूँ और तपस्वियों में तप हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

ईश्वर का अंश हर जगह है – सुगन्ध, तेज, जीवनशक्ति और तप में।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

मैं पृथ्वी की पुण्य सुगन्ध हूँ, अग्नि का तेज हूँ, समस्त प्राणियों का जीवन हूँ, और तपस्वियों का तप हूँ।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

ईश्वर सभी श्रेष्ठ गुणों और शक्तियों का स्रोत है। सुगन्ध, प्रकाश, जीवन और तप – ये सब उसी की विभूतियाँ हैं।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga)
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श्लोक 9/30 30% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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