श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 7 (ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga))

अध्याय 7 · श्लोक 14

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 30 2 मिनट का पठन 159 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया । मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते ॥ १४॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
दैवी
दिव्य
हि
निश्चय ही
एषा
यह
गुणमयी
गुणों से बनी
मम
मेरी
माया
माया
दुरत्यया
दुस्तर
माम्
मुझको
एव
ही
ये
जो
प्रपद्यन्ते
शरण में आते हैं
मायाम्
माया को
एताम्
इस
तरन्ति
पार करते हैं
ते
वे।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

यह मेरी दिव्य माया, जो गुणों से बनी है, अत्यन्त दुस्तर है। परन्तु जो मुझमें ही शरण लेते हैं, वे इस माया को पार कर जाते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

माया (अज्ञान) को पार करना बहुत कठिन है, लेकिन ईश्वर की शरण में जाने से वह सरल हो जाती है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

यह मेरी दिव्य माया, जो तीनों गुणों से बनी है, अत्यन्त दुर्गम है। परन्तु जो मनुष्य केवल मेरी शरण ग्रहण करते हैं, वे इस माया को पार कर जाते हैं।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

माया के बन्धन से छूटने का एकमात्र उपाय ईश्वर की शरणागति है। भक्ति के बिना माया को पार करना असंभव है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 14 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 14/30 47% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!