श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 7 (ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga))

अध्याय 7 · श्लोक 15

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 30 2 मिनट का पठन 125 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
न मां दुष्कृतिनो मूढाः प्रपद्यन्ते नराधमाः । माययापहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिताः ॥ १५॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

11 पद
न
नहीं
माम्
मुझे
दुष्कृतिनः
पापी
मूढाः
मूढ़
प्रपद्यन्ते
भजते
नराधमाः
नराधम
मायया
माया से
अपहृतज्ञाना
जिनका ज्ञान हर लिया गया है
आसुरम्
आसुरी
भावम्
भाव को
आश्रिताः
आश्रित हुए।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

दुष्कर्मी, मूढ़, नराधम तथा जिनका ज्ञान माया से हर लिया गया है और जो आसुरी भाव को आश्रित हैं, वे मुझे नहीं भजते।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

चार प्रकार के लोग भगवान की शरण नहीं लेते: पापी, मूर्ख, नीच और आसुरी प्रवृत्ति के लोग।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

दुष्कर्मी, मूढ़ (मूर्ख), नराधम (अधम मनुष्य) तथा जिनका ज्ञान माया द्वारा हर लिया गया है और जो आसुरी भाव को धारण किए हुए हैं – ऐसे लोग मेरी शरण नहीं ग्रहण करते।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान की भक्ति के लिए पवित्रता, बुद्धि और सात्त्विक भाव आवश्यक हैं। पाप और अज्ञान में डूबे लोग भक्ति के पात्र नहीं बन पाते।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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