मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते । वासुदेवः सर्वमिति स महात्मा सुदुर्लभः ॥ १९॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदबहूनाम्
अनेक
जन्मनाम्
जन्मों के
अन्ते
अन्त में
ज्ञानवान्
ज्ञानवान् पुरुष
माम्
मुझे
प्रपद्यते
शरण लेता है
वासुदेवः
वासुदेव
सर्वम्
सब कुछ
इति
इस प्रकार
सः
वह
महात्मा
महात्मा
सुदुर्लभः
अत्यन्त दुर्लभ।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
अनेक जन्मों के अन्त में ज्ञानवान् पुरुष मुझे इस प्रकार जानकर कि "वासुदेव सब कुछ है" मेरी शरण ग्रहण करता है। ऐसा महात्मा अत्यन्त दुर्लभ होता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
सच्चा ज्ञान अनेक जन्मों के साधना के बाद मिलता है, जब जीव समझ जाता है कि ईश्वर ही सब कुछ है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
अनेक जन्मों के अन्त में ज्ञानी पुरुष मुझे इस प्रकार जानकर कि "वासुदेव ही सब कुछ हैं" मेरी शरण ग्रहण करता है। ऐसा महात्मा अत्यन्त दुर्लभ है।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
पूर्ण ज्ञान का अर्थ है ईश्वर को सर्वव्यापी और सर्वस्व मान लेना। यह अवस्था बहुत कठिनाई से प्राप्त होती है।