श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 7 (ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga))

अध्याय 7 · श्लोक 20

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 30 3 मिनट का पठन 118 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
कामैस्तैस्तैर्हृतज्ञानाः प्रपद्यन्ते ऽन्यदेवताः । तं तं नियममास्थाय प्रकृत्या नियताः स्वया ॥ २०॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

11 पद
कामैः
कामनाओं से
तैस्तैः
उन-उन (विभिन्न)
हृतज्ञानाः
जिनका ज्ञान हर लिया गया है
प्रपद्यन्ते
शरण लेते हैं
अन्यदेवताः
अन्य देवताओं की
तं तम्
उस-उस
नियमम्
नियम को
आस्थाय
अपना कर
प्रकृत्या
प्रकृति से
नियताः
नियन्त्रित
स्वया
अपनी।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जिनका ज्ञान विविध कामनाओं से हर लिया गया है, वे अपनी-अपनी प्रकृति के वशीभूत होकर अन्य देवताओं की शरण लेते हैं और उन-उन के नियमों का पालन करते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

जो लोग सांसारिक कामनाओं में फँसे हैं, वे विभिन्न देवी-देवताओं की उपासना करते हैं, किन्तु उनकी शरणागति सच्ची नहीं होती।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जिनका ज्ञान नाना प्रकार की कामनाओं द्वारा हर लिया गया है, वे अपनी प्रकृति के वशीभूत होकर अन्य देवताओं की शरण लेते हैं और उनके लिए निर्धारित नियमों का पालन करते हैं।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

देवोपासना भी ईश्वर की ही उपासना का एक अप्रत्यक्ष रूप है, किन्तु सीमित फल देने वाली है। सच्चा ज्ञानी एक परमात्मा की ही उपासना करता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 20 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 20/30 67% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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