श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 7 (ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga))

अध्याय 7 · श्लोक 22

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 30 2 मिनट का पठन 120 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते । लभते च ततः कामान्मयैव विहितान्हि तान् ॥ २२॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
स
वह
तया
उस श्रद्धा से
युक्तः
युक्त होकर
तस्य
उस (देवता) की
आराधनम्
आराधना
ईहते
करता है
लभते
प्राप्त करता है
च
और
ततः
उससे
कामान्
अभीष्ट वस्तुओं को
मया
मेरे द्वारा
एव
ही
विहितान्
नियत
हि
निश्चय ही
तान्
उनको।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

वह उस श्रद्धा से युक्त होकर उस (देवता) की आराधना करता है और उससे अपने अभीष्ट पदार्थों को प्राप्त करता है – वे सब मेरे द्वारा ही नियत किए गए होते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भक्त अपनी श्रद्धा से देवता की उपासना करता है और वांछित फल पाता है, किन्तु वास्तव में वह फल भगवान ही देते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

वह उस श्रद्धा से युक्त होकर उस देवता की आराधना करता है और उससे अपने अभीष्ट पदार्थों को प्राप्त करता है – और वे सब मेरे द्वारा ही नियत किए गए होते हैं।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

सभी फलों का दाता अंततः परमेश्वर ही है। भक्त चाहे किसी भी देवता की उपासना करे, फल तो ईश्वर ही प्रदान करते हैं।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 22 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 22/30 73% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!