श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 7 (ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga))

अध्याय 7 · श्लोक 23

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 30 2 मिनट का पठन 124 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम् । देवान्देवयजो यान्ति मद्भक्ता यान्ति मामपि ॥ २३॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
अन्तवत्
नाशवान्
तु
तो
फलम्
फल
तेषाम्
उनका
तत्
वह
भवति
होता है
अल्पमेधसाम्
अल्पबुद्धि वालों का
देवान्
देवताओं को
देवयजः
देवताओं के पूजक
यान्ति
प्राप्त होते हैं
मद्भक्ताः
मेरे भक्त
यान्ति
प्राप्त होते हैं
माम्
मुझको
अपि
भी।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

उन अल्पबुद्धि वालों का वह फल नाशवान् होता है। देवताओं के पूजक देवताओं को प्राप्त होते हैं, परन्तु मेरे भक्त मुझको ही प्राप्त होते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

देवताओं की उपासना से मिलने वाला फल सीमित और नाशवान् है, जबकि भगवान की भक्ति से प्राप्त फल अनन्त और अविनाशी है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

उन अल्पबुद्धि वालों का वह (देवोपासना से प्राप्त) फल नाशवान् होता है। देवताओं के पूजक देवताओं को प्राप्त होते हैं, परन्तु मेरे भक्त मुझको ही प्राप्त होते हैं।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भौतिक कामनाओं की पूर्ति अस्थायी है। परम लक्ष्य ईश्वर-प्राप्ति है, जो शाश्वत आनन्द देता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 23 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 23/30 77% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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