मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अव्यक्तं व्यक्तिमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धयः । परं भावमजानन्तो ममाव्ययमनुत्तमम् ॥ २४॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदअव्यक्तम्
अव्यक्त
व्यक्तिम्
व्यक्त रूप को
आपन्नम्
प्राप्त हुआ
मन्यन्ते
मानते हैं
माम्
मुझे
अबुद्धयः
अबुद्धि लोग
परम्
परम
भावम्
भाव को
अजानन्तः
न जानते हुए
मम
मेरे
अव्ययम्
अविनाशी
अनुत्तमम्
उत्तम।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
अबुद्धि लोग मुझ अव्यक्त को व्यक्त रूप में प्राप्त मानते हैं, वे मेरे परम, अविनाशी और अनुत्तम भाव को नहीं जानते।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अज्ञानी लोग भगवान को एक साधारण मनुष्य के रूप में देखते हैं, जबकि वे निर्गुण, अव्यक्त और परम हैं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
अबुद्धि (अज्ञानी) लोग मुझ अव्यक्त (अप्रकट) को व्यक्त रूप में (मनुष्य के रूप में) प्राप्त मानते हैं। वे मेरे परम, अविनाशी और अनुत्तम (सर्वोत्तम) भाव को नहीं जानते।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भगवान का स्वरूप अव्यक्त और निर्गुण है, फिर भी वे लीला करने के लिए व्यक्त होते हैं। अज्ञानी उनके दिव्य स्वरूप को नहीं पहचान पाते।