श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 7 (ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga))

अध्याय 7 · श्लोक 25

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 30 2 मिनट का पठन 122 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः । मूढो ऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम् ॥ २५॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
न
नहीं
अहम्
मैं
प्रकाशः
प्रकट
सर्वस्य
सबके लिए
योगमाया
योगमाया से
समावृतः
आवृत
मूढः
मूढ़
अयम्
यह
न
नहीं
अभिजानाति
जानता
लोकः
लोक
माम्
मुझे
अजम्
अजन्मा
अव्ययम्
अविनाशी।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

मैं योगमाया से आवृत होने के कारण सबके लिए प्रकट नहीं होता। यह मूढ़ संसार मुझ अजन्मा और अविनाशी को नहीं जानता।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान अपनी योगमाया से ढके रहते हैं, जिससे अज्ञानी उन्हें नहीं पहचान पाते।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

मैं योगमाया से आच्छादित होने के कारण सबके लिए प्रकट नहीं होता। यह मूढ़ संसार मुझ अजन्मा और अविनाशी को नहीं जानता।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

ईश्वर की लीला और माया अद्भुत है। जब तक माया का आवरण नहीं हटता, तब तक सत्य का साक्षात्कार नहीं होता।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 25 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 25/30 83% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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