श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 7 (ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga))

अध्याय 7 · श्लोक 26

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 30 2 मिनट का पठन 108 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन । भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन ॥ २६॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
वेद
जानता हूँ
अहम्
मैं
समतीतानि
बीते हुए
वर्तमानानि
वर्तमान
च
और
अर्जुन
हे अर्जुन
भविष्याणि
भविष्य में होने वाले
च
भी
भूतानि
सब प्राणियों को
माम्
मुझे
तु
तो
वेद
जानता है
न
नहीं
कश्चन
कोई भी।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे अर्जुन! मैं समस्त प्राणियों को, जो बीत चुके हैं, वर्तमान में हैं और भविष्य में होंगे, जानता हूँ। परन्तु मुझे कोई नहीं जानता।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान सर्वज्ञ हैं – वे भूत, वर्तमान और भविष्य सब जानते हैं, किन्तु उनके दिव्य स्वरूप को कोई नहीं जान पाता।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

हे अर्जुन! मैं भूत, वर्तमान और भविष्य के समस्त प्राणियों को जानता हूँ। परन्तु मुझे कोई नहीं जानता।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

ईश्वर सर्वज्ञ और सर्वव्यापी है। उसे जानने के लिए उसकी कृपा और भक्ति आवश्यक है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga)
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श्लोक 26/30 87% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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