मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन । भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन ॥ २६॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
14 पदवेद
जानता हूँ
अहम्
मैं
समतीतानि
बीते हुए
वर्तमानानि
वर्तमान
च
और
अर्जुन
हे अर्जुन
भविष्याणि
भविष्य में होने वाले
च
भी
भूतानि
सब प्राणियों को
माम्
मुझे
तु
तो
वेद
जानता है
न
नहीं
कश्चन
कोई भी।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे अर्जुन! मैं समस्त प्राणियों को, जो बीत चुके हैं, वर्तमान में हैं और भविष्य में होंगे, जानता हूँ। परन्तु मुझे कोई नहीं जानता।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान सर्वज्ञ हैं – वे भूत, वर्तमान और भविष्य सब जानते हैं, किन्तु उनके दिव्य स्वरूप को कोई नहीं जान पाता।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे अर्जुन! मैं भूत, वर्तमान और भविष्य के समस्त प्राणियों को जानता हूँ। परन्तु मुझे कोई नहीं जानता।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
ईश्वर सर्वज्ञ और सर्वव्यापी है। उसे जानने के लिए उसकी कृपा और भक्ति आवश्यक है।