श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga))

अध्याय 8 · श्लोक 10

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 109 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
प्रयाणकाले मनसाचलेन भक्त्या युक्तो योगबलेन चैव । भ्रुवोर्मध्ये प्राणमावेश्य सम्यक् स तं परं पुरुषमुपैति दिव्यम् ॥ १०॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

19 पद
प्रयाणकाले
at the time of death
मनसा
with mind
अचलेन
unmoving
भक्त्या
with devotion
युक्तः
endowed
योगबलेन
by the power of yoga
च
and
एव
indeed
भ्रुवोः
of the eyebrows
मध्ये
in the space between
प्राणम्
the life force
आवेश्य
having placed
सम्यक्
properly
सः
he
तम्
that
परम्
Supreme
पुरुषम्
Person
उपैति
attains
दिव्यम्
divine.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

अन्तकाल में अचल मन से, भक्ति और योगबल से युक्त होकर, भौंहों के मध्य प्राण को सम्यक् रूप से स्थापित करके, वह योगी उस परम दिव्य पुरुष को प्राप्त होता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक मृत्यु के समय ध्यान की विधि बताता है: मन को स्थिर कर, भक्ति और योगबल से प्राण को आज्ञाचक्र में लगाकर, भगवान को प्राप्त होता है। This verse describes the method of meditation at death: with a steady mind, devotion, and yogic power, fixing the prana between the eyebrows, one attains the Lord.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कृष्ण कहते हैं: अन्तकाल में अचल मन से, भक्ति और योगबल से युक्त होकर, भौंहों के मध्य प्राण को सम्यक् रूप से स्थापित करके, वह योगी उस परम दिव्य पुरुष को प्राप्त होता है। Krishna says: At the time of death, with an unmoving mind, endowed with devotion and the power of yoga, fixing the life force properly between the eyebrows, one attains that Supreme Divine Person.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यहाँ योग और भक्ति का समन्वय है। योग के माध्यम से प्राण को नियंत्रित करना और भक्ति से मन को भगवान में लगाना - यह दोनों मिलकर मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करते हैं। Here yoga and devotion are combined. Controlling the prana through yoga and fixing the mind on the Lord through devotion together pave the way to liberation.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 10 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 10/28 36% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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