मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
कविं पुराणमनुशासितारमणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः । सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूपमादित्यवर्णं तमसः परस्तात् ॥ ९॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदकविम्
the all-knowing
पुराणम्
the ancient
अनुशासितारम्
the ruler
अणोः
than an atom
अणीयांसम्
smaller
अनुस्मरेत्
should meditate
यः
who
सर्वस्य
of all
धातारम्
the supporter
अचिन्त्यरूपम्
inconceivable form
आदित्यवर्णम्
luminous like the sun
तमसः
from darkness
परस्तात्
beyond.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जो पुरुष सबको जानने वाले, सनातन, सबके नियन्ता, अणु से भी सूक्ष्म, सबके धारक, अचिन्त्य रूप वाले, सूर्य के समान तेजस्वी और अज्ञान के अंधकार से परे परमात्मा का स्मरण करता है...
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह श्लोक परमात्मा के विभिन्न गुणों का वर्णन करता है, जिनका ध्यान करना चाहिए। यह सगुण और निर्गुण दोनों पहलुओं को समाहित करता है। This verse describes various attributes of the Supreme to be meditated upon. It encompasses both saguna and nirguna aspects.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
कृष्ण कहते हैं: जो पुरुष सबको जानने वाले, सनातन, सबके नियन्ता, अणु से भी सूक्ष्म, सबके धारक, अचिन्त्य रूप वाले, सूर्य के समान तेजस्वी और अज्ञान के अंधकार से परे परमात्मा का स्मरण करता है... Krishna says: One should meditate on the Supreme Person as the all-knowing, the ancient, the ruler, smaller than an atom, the supporter of all, of inconceivable form, luminous like the sun, and beyond the darkness of ignorance.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
यह श्लोक ध्यान के लिए परमात्मा के विविध गुणों को प्रस्तुत करता है, जिससे साधक उनमें से किसी एक पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। यह ईश्वर की सर्वव्यापकता और सर्वशक्तिमत्ता को दर्शाता है। This verse presents various attributes of the Supreme for meditation, allowing the seeker to focus on any one. It reveals God's omnipresence and omnipotence.