श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga))

अध्याय 8 · श्लोक 8

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 108 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अभ्यासयोगयुक्तेन चेतसा नान्यगामिना । परमं पुरुषं दिव्यं याति पार्थानुचिन्तयन् ॥ ८॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
अभ्यासयोगयुक्तेन
by the yoga of constant practice
चेतसा
with the mind
न
not
अन्यगामिना
going elsewhere
परमम्
Supreme
पुरुषम्
Person
दिव्यम्
divine
याति
attains
पार्थ
O Partha
अनुचिन्तयन्
meditating.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे पार्थ! अभ्यासयोग से युक्त तथा अन्य विषयों को न जाने वाले चित्त द्वारा परम दिव्य पुरुष का अनुचिन्तन करता हुआ योगी उन्हें प्राप्त होता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक ध्यान की विधि बताता है: निरंतर अभ्यास और एकाग्र मन से परमात्मा का चिंतन करने पर वह प्राप्त होता है। This verse describes the method of meditation: through constant practice and a focused mind, one attains the Supreme.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कृष्ण कहते हैं: हे पार्थ! अभ्यासयोग से युक्त तथा अन्य विषयों को न जाने वाले चित्त द्वारा परम दिव्य पुरुष का अनुचिन्तन करता हुआ योगी उन्हें प्राप्त होता है। Krishna says: O Partha, by meditating on the Supreme Divine Person with a mind engaged in the yoga of constant practice and not wandering elsewhere, one attains Him.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यहाँ ध्यान के लिए दो शर्तें हैं: नियमित अभ्यास और एकाग्रता। बिना अभ्यास के मन भटकता है और बिना एकाग्रता के ध्यान गहरा नहीं होता। Here two conditions for meditation are given: regular practice and concentration. Without practice, the mind wanders; without concentration, meditation is not deep.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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