मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च । मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम् ॥ ७॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदतस्मात्
therefore
सर्वेषु कालेषु
at all times
माम्
Me
अनुस्मर
remember
युध्य
fight
च
and
मयि
in Me
अर्पितमनोबुद्धिः
with mind and intellect fixed
माम्
to Me
एव
certainly
एष्यसि
you shall come
असंशयम्
without doubt.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
इसलिए तू सब समय मेरा स्मरण कर और युद्ध भी कर। इस प्रकार मुझमें मन और बुद्धि को अर्पित करने से तू निःसंदेह मुझको ही प्राप्त होगा।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
कृष्ण अर्जुन को सलाह देते हैं कि वह हर समय उनका स्मरण करते हुए अपने कर्तव्य (युद्ध) का पालन करे। यह कर्मयोग और भक्ति का समन्वय है। Krishna advises Arjuna to remember Him at all times while performing his duty (fighting). This is the synthesis of Karma Yoga and Bhakti.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
कृष्ण कहते हैं: इसलिए तू सब समय मेरा स्मरण कर और युद्ध भी कर। इस प्रकार मुझमें मन और बुद्धि को अर्पित करने से तू निःसंदेह मुझको ही प्राप्त होगा। Krishna says: Therefore, at all times remember Me and fight. With your mind and intellect fixed on Me, you will certainly come to Me alone, without doubt.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
यहाँ भगवान सिखाते हैं कि संसार में रहते हुए भी ईश्वर-स्मरण संभव है। हमें अपने कर्म करते हुए भी मन को परमात्मा में लगाना चाहिए। Here the Lord teaches that God-remembrance is possible while living in the world. We should perform our duties while keeping our mind fixed on the Supreme.