श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga))

अध्याय 8 · श्लोक 13

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 112 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् । यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम् ॥ १३॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
ओम्
Om
इति
thus
एकाक्षरम्
the one-syllabled
ब्रह्म
Brahman
व्याहरन्
uttering
माम्
Me
अनुस्मरन्
remembering
यः
who
प्रयाति
departs
त्यजन्
abandoning
देहम्
the body
सः
he
याति
attains
परमाम्
supreme
गतिम्
goal.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जो पुरुष एकाक्षर ब्रह्म ॐ का उच्चारण करता हुआ और मेरा स्मरण करता हुआ शरीर त्यागकर जाता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक ॐ के जप और भगवान के स्मरण के साथ मृत्यु के महत्व को बताता है। ॐ ब्रह्म का वाचक है और इसे जपते हुए मरने वाला परम धाम जाता है। This verse highlights the importance of uttering Om and remembering the Lord at death. Om is the sound representation of Brahman, and one who dies while chanting it attains the supreme abode.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कृष्ण कहते हैं: जो पुरुष एकाक्षर ब्रह्म ॐ का उच्चारण करता हुआ और मेरा स्मरण करता हुआ शरीर त्यागकर जाता है, वह परम गति को प्राप्त होता है। Krishna says: He who departs by abandoning the body while uttering the one-syllabled Brahman, Om, and remembering Me, attains the supreme goal.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

ॐ प्रणव है, जो सृष्टि की मूल ध्वनि है और ब्रह्म का प्रतीक है। जीवन भर ॐ का जप और भगवान का स्मरण करने से अन्तकाल में वही संस्कार जागृत होता है और मोक्ष मिलता है। Om is the primordial sound, the symbol of Brahman. Chanting Om and remembering the Lord throughout life awakens those impressions at death and leads to liberation.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga)
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श्लोक 13/28 46% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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