मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम् । नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः ॥ १५॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदमाम्
Me
उपेत्य
having attained
पुनः
again
जन्म
birth
दुःखालयम्
abode of sorrow
अशाश्वतम्
impermanent
न
not
आप्नुवन्ति
obtain
महात्मानः
great souls
संसिद्धिम्
perfection
परमाम्
supreme
गताः
attained.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
मुझको प्राप्त करके वे महात्मा पुनः दुःखरूपी आलय और नाशवान संसार में जन्म नहीं पाते, क्योंकि वे परम सिद्धि को प्राप्त हो चुके होते हैं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह श्लोक मुक्त आत्माओं की स्थिति बताता है: भगवान को प्राप्त कर लेने पर वे पुनः जन्म-मृत्यु के चक्र में नहीं लौटते। This verse describes the state of liberated souls: having attained the Lord, they do not return to the cycle of birth and death.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
कृष्ण कहते हैं: मुझको प्राप्त करके वे महात्मा पुनः दुःखरूपी आलय और नाशवान संसार में जन्म नहीं पाते, क्योंकि वे परम सिद्धि को प्राप्त हो चुके होते हैं। Krishna says: Having attained Me, these great souls do not take birth again in this impermanent abode of sorrow, for they have attained the supreme perfection.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
यहाँ भगवान आश्वासन देते हैं कि उनकी प्राप्ति के बाद जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। यह भक्ति का फल है। Here the Lord assures that attaining Him means freedom from the bondage of birth and death. This is the fruit of devotion.