श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga))

अध्याय 8 · श्लोक 17

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 121 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद्ब्रह्मणो विदुः । रात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जनाः ॥ १७॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
सहस्रयुगपर्यन्तम्
lasting a thousand yugas
अहः
day
यत्
which
ब्रह्मणः
of Brahma
विदुः
know
रात्रिम्
night
युगसहस्रान्ताम्
ending after a thousand yugas
ते
they
अहोरात्रविदः
knowers of day and night
जनाः
persons.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जो पुरुष ब्रह्मा के दिन को (जो) हजार युगों का (है) और रात्रि को भी हजार युगों की अवधि वाली जानते हैं, वे मनुष्य अहोरात्र (समय) के ज्ञाता हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक ब्रह्मा के समय-चक्र का वर्णन करता है: उनका एक दिन 1000 महायुगों का होता है, और रात भी उतनी ही। यह काल की विशालता को दर्शाता है। This verse describes the time cycle of Brahma: his day lasts a thousand yugas, and his night also a thousand yugas. It shows the vastness of cosmic time.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कृष्ण कहते हैं: जो पुरुष ब्रह्मा के दिन को (जो) हजार युगों का (है) और रात्रि को भी हजार युगों की अवधि वाली जानते हैं, वे मनुष्य अहोरात्र (समय) के ज्ञाता हैं। Krishna says: Those who know the day of Brahma, which lasts a thousand yugas, and the night of Brahma, which also lasts a thousand yugas, are the knowers of day and night.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह श्लोक हमें ब्रह्माण्डीय समय की विशालता का आभास कराता है। मानव जीवन इसकी तुलना में क्षणभंगुर है, इसलिए आध्यात्मिक साधना का महत्व समझना चाहिए। This verse gives a sense of the vastness of cosmic time. Human life is momentary in comparison, so one should realize the importance of spiritual practice.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga)
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श्लोक 17/28 61% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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