श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga))

अध्याय 8 · श्लोक 18

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 107 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अव्यक्ताद्व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे । रात्र्यागमे प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसंज्ञके ॥ १८॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
अव्यक्तात्
from the unmanifest
व्यक्तयः
manifestations
सर्वाः
all
प्रभवन्ति
come forth
अहःआगमे
at the coming of day
रात्रिआगमे
at the coming of night
प्रलीयन्ते
dissolve
तत्र
in that
एव
indeed
अव्यक्तसंज्ञके
called the unmanifest.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

ब्रह्मा के दिन के आरम्भ में सभी व्यक्त (प्रकट) पदार्थ अव्यक्त (अप्रकट) से उत्पन्न होते हैं; और रात्रि के आरम्भ में उसी अव्यक्त (नाम वाले) में लीन हो जाते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक सृष्टि और प्रलय के चक्र को बताता है: ब्रह्मा के दिन में अव्यक्त से सृष्टि होती है, और रात में वापस अव्यक्त में लय हो जाती है। This verse describes the cycle of creation and dissolution: during Brahma's day, the manifest emerges from the unmanifest, and at night it dissolves back into it.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कृष्ण कहते हैं: ब्रह्मा के दिन के आरम्भ में सभी व्यक्त (प्रकट) पदार्थ अव्यक्त (अप्रकट) से उत्पन्न होते हैं; और रात्रि के आरम्भ में उसी अव्यक्त (नाम वाले) में लीन हो जाते हैं। Krishna says: At the approach of Brahma's day, all manifestations come forth from the unmanifest; at the approach of night, they dissolve into that same unmanifest, called the avyakta.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह चक्र बताता है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड भी सृष्टि और प्रलय के अधीन है। केवल परमात्मा ही इनसे परे है। This cycle shows that even the entire universe is subject to creation and dissolution. Only the Supreme Lord transcends them.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga)
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श्लोक 18/28 64% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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