मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
भूतग्रामः स एवायं भूत्वा भूत्वा प्रलीयते । रात्र्यागमेऽवशः पार्थ प्रभवत्यहरागमे ॥ १९॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
11 पदभूतग्रामः
multitude of beings
सः
that
एव
indeed
अयम्
this
भूत्वा भूत्वा
being born repeatedly
प्रलीयते
dissolves
रात्रिआगमे
at the coming of night
अवशः
helpless
पार्थ
O Partha
प्रभवति
come forth
अहःआगमे
at the coming of day.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे पार्थ! प्राणियों का यह समूह (रात्रि के आने पर) बार-बार उत्पन्न होकर विवश भाव से लीन हो जाता है और (दिन के आने पर) फिर प्रकट होता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह श्लोक बताता है कि सभी प्राणी सृष्टि-प्रलय के चक्र में बंधे हैं, विवश होकर बार-बार जन्मते और मरते हैं। This verse states that all beings are bound in the cycle of creation and dissolution, helplessly being born and dying again and again.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
कृष्ण कहते हैं: हे पार्थ! प्राणियों का यह समूह (रात्रि के आने पर) बार-बार उत्पन्न होकर विवश भाव से लीन हो जाता है और (दिन के आने पर) फिर प्रकट होता है। Krishna says: O Partha, this multitude of beings, being born again and again, helplessly dissolves at the coming of night, and comes forth at the coming of day.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
यह श्लोक संसार की अनित्यता और जीवों की अवशता (परतंत्रता) को दर्शाता है। इस चक्र से मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय भगवद्प्राप्ति है। This verse shows the impermanence of the world and the helplessness of living beings. The only way to get out of this cycle is to attain the Lord.