श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga))

अध्याय 8 · श्लोक 23

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 3 मिनट का पठन 121 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिनः । प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ ॥ २३॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
यत्र काले
at which time
तु
indeed
अनावृत्तिम्
non-return
आवृत्तिम्
return
च
and
एव
also
योगिनः
yogis
प्रयाताः
having departed
यान्ति
go
तम्
that
कालम्
time
वक्ष्यामि
I shall declare
भरतर्षभ
O best of the Bharatas.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे भरतश्रेष्ठ! जिस काल (समय) में मरकर योगी लौटकर नहीं आते और जिस काल में मरकर लौटते हैं, उस काल को मैं बताऊँगा।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

अब कृष्ण उन दो मार्गों का वर्णन करेंगे जिनसे योगी मरने के बाद या तो लौटते हैं या नहीं लौटते। Krishna will now describe the two paths after death: one leading to return, the other to non-return (liberation).

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कृष्ण कहते हैं: हे भरतश्रेष्ठ! जिस काल (समय) में मरकर योगी लौटकर नहीं आते और जिस काल में मरकर लौटते हैं, उस काल को मैं बताऊँगा। Krishna says: O best of the Bharatas, I will now declare that time departing at which yogis attain non-return, and also the time departing at which they return.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यहाँ भगवान मृत्यु के समय के महत्व पर प्रकाश डालते हैं। योगी लोग मृत्यु के समय की परिस्थितियों के अनुसार विभिन्न गतियों को प्राप्त होते हैं। Here the Lord highlights the importance of the time of death. Yogis attain different destinations depending on the circumstances at death.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga)
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श्लोक 23/28 82% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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