मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अग्निर्ज्योतिरहः शुक्लः षण्मासा उत्तरायणम् । तत्र प्रयाता गच्छन्ति ब्रह्म ब्रह्मविदो जनाः ॥ २४॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदअग्निः
fire
ज्योतिः
light
अहः
day
शुक्लः
bright fortnight
षण्मासाः
six months
उत्तरायणम्
the northern path of the sun
तत्र
there
प्रयाताः
having departed
गच्छन्ति
go
ब्रह्म
Brahman
ब्रह्मविदः
knowers of Brahman
जनाः
people.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
अग्नि, ज्योति, दिन, शुक्ल पक्ष और उत्तरायण के छः महीने; इस मार्ग से जाने वाले ब्रह्मवेत्ता पुरुष ब्रह्म को प्राप्त होते हैं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह श्लोक उस मार्ग (देवयान) का वर्णन करता है जिससे योगी मरने के बाद ब्रह्म को प्राप्त होते हैं और लौटकर नहीं आते। This verse describes the path (Devayana) by which yogis attain Brahman and do not return.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
कृष्ण कहते हैं: अग्नि, ज्योति, दिन, शुक्ल पक्ष और उत्तरायण के छः महीने; इस मार्ग से जाने वाले ब्रह्मवेत्ता पुरुष ब्रह्म को प्राप्त होते हैं। Krishna says: Fire, light, daytime, the bright fortnight, and the six months of the northern solstice—departing by this path, the knowers of Brahman attain Brahman.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
यह देवयान मार्ग है, जो शुभ समय में मृत्यु को दर्शाता है। ऐसे समय में मरने वाले ज्ञानी योगी ब्रह्मलोक या मोक्ष को जाते हैं। This is the Devayana path, indicating death at an auspicious time. Wise yogis dying at such times attain the world of Brahma or liberation.