श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga))

अध्याय 8 · श्लोक 25

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 117 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
धूमो रात्रिस्तथा कृष्णः षण्मासा दक्षिणायनम् । तत्र चान्द्रमसं ज्योतिर्योगी प्राप्य निवर्तते ॥ २५॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
धूमः
smoke
रात्रिः
night
तथा
also
कृष्णः
dark fortnight
षण्मासाः
six months
दक्षिणायनम्
the southern path
तत्र
there
चान्द्रमसम्
lunar
ज्योतिः
light
योगी
yogi
प्राप्य
attaining
निवर्तते
returns.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

धूम, रात्रि, कृष्ण पक्ष और दक्षिणायन के छः महीने; इस मार्ग से जाने वाला योगी चन्द्रज्योति को प्राप्त होकर लौटता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक दूसरे मार्ग (पितृयान) का वर्णन करता है, जिससे योगी चन्द्रलोक को प्राप्त होते हैं और पुनः लौटते हैं। This verse describes the other path (Pitriyana) by which yogis attain the lunar world and return.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कृष्ण कहते हैं: धूम, रात्रि, कृष्ण पक्ष और दक्षिणायन के छः महीने; इस मार्ग से जाने वाला योगी चन्द्रज्योति को प्राप्त होकर लौटता है। Krishna says: Smoke, night, the dark fortnight, and the six months of the southern solstice—departing by this path, the yogi attains the lunar light and returns.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह पितृयान मार्ग है, जो अशुभ समय में मृत्यु का संकेत देता है। ऐसे योगी चन्द्रलोक में जाते हैं और पुण्य क्षय होने पर पुनः जन्म लेते हैं। This is the Pitriyana path, indicating death at an inauspicious time. Such yogis go to the lunar world and return when their merits are exhausted.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga)
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श्लोक 25/28 89% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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