श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga))

अध्याय 8 · श्लोक 26

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 109 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते । एकया यात्यनावृत्तिमन्ययाऽऽवर्तते पुनः ॥ २६॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
शुक्लकृष्णे
bright and dark
गती
paths
हि
indeed
एते
these
जगतः
of the world
शाश्वते
eternal
मते
are considered
एकया
by one
याति
goes
अनावृत्तिम्
to non-return
अन्यया
by the other
आवर्तते
returns
पुनः
again.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

ये शुक्ल और कृष्ण दो गतियाँ (मार्ग) संसार में सनातन मानी गई हैं। इनमें से एक से (जाने वाला) लौटकर नहीं आता, दूसरे से (जाने वाला) पुनः लौट आता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक दोनों मार्गों का सार प्रस्तुत करता है: एक मोक्ष की ओर ले जाता है, दूसरा पुनर्जन्म की ओर। This verse summarizes the two paths: one leads to liberation, the other to rebirth.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कृष्ण कहते हैं: ये शुक्ल और कृष्ण दो गतियाँ (मार्ग) संसार में सनातन मानी गई हैं। इनमें से एक से (जाने वाला) लौटकर नहीं आता, दूसरे से (जाने वाला) पुनः लौट आता है। Krishna says: These two paths, the bright and the dark, are considered eternal for the world. By one, one goes to non-return; by the other, one returns again.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह श्लोक सिखाता है कि मृत्यु के बाद दो गतियाँ हैं। साधक को प्रयास करना चाहिए कि वह शुक्ल मार्ग से जाए, जो पुनरावृत्ति से मुक्त कराता है। This verse teaches that there are two paths after death. The seeker should strive to take the bright path, which leads to freedom from rebirth.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga)
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श्लोक 26/28 93% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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