श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga))

अध्याय 8 · श्लोक 27

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 3 मिनट का पठन 104 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
नैते सृती पार्थ जानन्योगी मुह्यति कश्चन । तस्मात्सर्वेषु कालेषु योगयुक्तो भवार्जुन ॥ २७॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
न
not
एते
these
सृती
two paths
पार्थ
O Partha
जानन्
knowing
योगी
yogi
मुह्यति
is deluded
कश्चन
anyone
तस्मात्
therefore
सर्वेषु कालेषु
at all times
योगयुक्तः
steadfast in yoga
भव
be
अर्जुन
O Arjuna.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे पार्थ! इन दोनों मार्गों को जानने वाला कोई भी योगी मोहित नहीं होता। इसलिए हे अर्जुन! तू सब समय योग में स्थित रह।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक सीख देता है कि इन मार्गों का ज्ञान होने पर योगी भ्रमित नहीं होता, और सदा योग में स्थित रहने की प्रेरणा देता है। This verse teaches that knowing these paths, a yogi is not deluded, and encourages always being steadfast in yoga.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कृष्ण कहते हैं: हे पार्थ! इन दोनों मार्गों को जानने वाला कोई भी योगी मोहित नहीं होता। इसलिए हे अर्जुन! तू सब समय योग में स्थित रह। Krishna says: O Partha, knowing these two paths, no yogi is deluded. Therefore, O Arjuna, be steadfast in yoga at all times.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह श्लोक योग के निरंतर अभ्यास का आग्रह करता है। मार्गों का ज्ञान होने पर भी योगाभ्यास आवश्यक है ताकि सही गति सुनिश्चित हो। This verse urges continuous practice of yoga. Even with knowledge of the paths, yogic practice is necessary to ensure the right destination.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga)
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श्लोक 27/28 96% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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