श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga))

अध्याय 8 · श्लोक 5

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 28 4 मिनट का पठन 112 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् । यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः ॥ ५॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

16 पद
अन्तकाले
at the time of death
च
and
माम्
Me
एव
alone
स्मरन्
remembering
मुक्त्वा
abandoning
कलेवरम्
the body
यः
who
प्रयाति
departs
सः
he
मद्भावम्
My nature
याति
attains
न
not
अस्ति
there is
अत्र
here
संशयः
doubt.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

और जो मनुष्य अन्तकाल में शरीर त्यागते समय केवल मेरा स्मरण करता हुआ प्राण त्यागता है, वह मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है; इसमें कोई संशय नहीं है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक मृत्यु के समय भगवान के स्मरण के महत्व को रेखांकित करता है। जो अन्तकाल में भी कृष्ण का स्मरण करता है, वह उनके धाम को प्राप्त होता है। This verse highlights the importance of remembering the Lord at the time of death. Whoever remembers Krishna even at the final moment attains His abode.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कृष्ण कहते हैं: और जो मनुष्य अन्तकाल में शरीर त्यागते समय केवल मेरा स्मरण करता हुआ प्राण त्यागता है, वह मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है; इसमें कोई संशय नहीं है। Krishna says: And whoever, at the time of death, gives up the body and departs, remembering Me alone, attains My state; there is no doubt about this.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह श्लोक सिखाता है कि मृत्यु के समय मन की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि हम जीवन भर भगवान का स्मरण करते हैं, तो अन्तकाल में भी वही भाव रहेगा और हम मुक्ति पा सकते हैं। This verse teaches that the state of mind at the time of death is crucial. If we remember the Lord throughout life, that thought will remain at the end and we can attain liberation.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga)
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श्लोक 5/28 18% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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