श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 9 (राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga))

अध्याय 9 · श्लोक 11

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 34 3 मिनट का पठन 154 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम् | परं भावमजानन्तो मम भूतमहेश्वरम् || ११||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

11 पद
अवजानन्ति
तिरस्कार करते हैं
माम्
मुझे
मूढाः
मूर्ख लोग
मानुषीम्
मनुष्य-रूपी
तनुम्
शरीर
आश्रितम्
धारण किए हुए
परम्
परम
भावम्
भाव (स्वरूप)
अजानन्तः
न जानते हुए
मम
मेरा
भूत-महेश्वरम्
सम्पूर्ण प्राणियों का महान ईश्वर।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

मूढ़ लोग मुझे मनुष्य रूप में धारण किये हुए (देखकर) तिरस्कार करते हैं। वे सम्पूर्ण भूतों के महेश्वर मेरे परम भाव को नहीं जानते।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

जब भगवान साकार रूप में अवतार लेते हैं, तो अज्ञानी लोग उन्हें साधारण मनुष्य समझकर उनका अपमान करते हैं। वे यह नहीं जानते कि वही सबके स्वामी हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

मूर्ख लोग मुझे मनुष्य-रूप में अवतीर्ण देखकर मेरा तिरस्कार करते हैं, क्योंकि वे सम्पूर्ण प्राणियों के महेश्वर मेरे परम स्वरूप को नहीं जानते।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान के अवतार को समझने के लिए शास्त्रीय दृष्टि चाहिए। बाहरी दृष्टि से देखने पर वे साधारण लग सकते हैं, पर वे सर्वशक्तिमान हैं। सच्ची श्रद्धा से ही उनका रहस्य खुलता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 9: राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 11 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 11/34 32% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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