श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 9 (राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga))

अध्याय 9 · श्लोक 14

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 34 3 मिनट का पठन 125 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सततं कीर्तयन्तो मां यतन्तश्च दृढव्रताः | नमस्यन्तश्च मां भक्त्या नित्ययुक्ता उपासते || १४||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
सततम्
निरन्तर
कीर्तयन्तः
कीर्तन करते हुए
माम्
मेरा
यतन्तः
प्रयत्न करते हुए
च
और
दृढ-व्रताः
दृढ़ व्रत वाले
नमस्यन्तः
नमस्कार करते हुए
च
और
माम्
मुझे
भक्त्या
भक्ति से
नित्य-युक्ताः
नित्ययुक्त
उपासते
उपासना करते हैं।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

निरन्तर मेरा कीर्तन करते हुए, दृढ़ व्रत वाले और यत्नशील होकर, तथा भक्तिपूर्वक मुझे नमस्कार करते हुए, वे नित्ययुक्त होकर मेरी उपासना करते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

महात्माओं के भक्ति के विभिन्न अंगों का वर्णन – कीर्तन, प्रयत्न, दृढ़ व्रत, नमस्कार, नित्ययुक्त होकर उपासना। यह नवधा भक्ति के कुछ अंग हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

वे निरन्तर मेरा कीर्तन करते हैं, दृढ़ व्रत के साथ यत्न करते हैं, भक्तिपूर्वक मुझे नमस्कार करते हैं, इस प्रकार नित्ययुक्त होकर मेरी उपासना करते हैं।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भक्ति केवल मानसिक नहीं, बल्कि क्रियात्मक भी है। कीर्तन, नमस्कार, दृढ़ संकल्प आदि से भक्ति पुष्ट होती है। साधक को नियमित रूप से इनका अभ्यास करना चाहिए।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 9: राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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