मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः | वेद्यं पवित्रमोंकार ऋक्साम यजुरेव च || १७||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदपिता
पिता
अहम्
मैं
अस्य
इस
जगतः
जगत् का
माता
माता
धाता
धारण करने वाला
पितामहः
पितामह
वेद्यम्
जानने योग्य
पवित्रम्
पवित्र करने वाला
ओंकार
ओंकार
ऋक्
ऋग्वेद
साम
सामवेद
यजुः
यजुर्वेद
एव
ही
च
और।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
मैं इस जगत् का पिता, माता, धाता (पालनकर्ता) और पितामह हूँ; मैं जानने योग्य हूँ, पवित्रकर्ता हूँ, ओंकार हूँ तथा ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी हूँ।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान सृष्टि के सम्बन्धों में भी व्याप्त हैं – पिता, माता, पालक, पितामह। वे वेदों के प्रतीक ओंकार तथा स्वयं तीनों वेद हैं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
मैं इस जगत् का पिता, माता, धाता (पालनकर्ता) और पितामह हूँ। मैं जानने योग्य, पवित्र करने वाला, ओंकार तथा ऋक्, साम और यजुर्वेद भी हूँ।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
ईश्वर हमारे सबसे निकट के सम्बन्धी हैं – पिता से भी अधिक स्नेही, माता से भी अधिक वात्सल्यमयी। उन्हीं की शरण में जाना चाहिए।